Sunday, October 30, 2011

Isn't this the way how songs should be?



A comment on one version posted in YouTube:
"Dark Room.
Candle.
Pain.
Just Imagine"
Though I don't need all that to immerse myself in this song, I get the point.

Simple lyrics, no fancy beats - and there are just too many beats in all songs nowadays, and music that actually makes the lyrics say more than they do. A throwback to the old Hindi songs for me. Lovely song. Makes me wanna watch this movie so very much!

I am searching for the full song. Will post if I get the link. But the lyrics of the full song go like this:


दिन परेशान है, रात भारी है
दिन परेशान है, रात भारी है
ज़िन्दगी है खेल फिर भी प्यारी है
क्या तमाशा है, कब से जारी है
क्या तमाशा है, कब से जारी है
ज़िन्दगी है खेल फिर भी प्यारी है
दिन परेशान है

इस कहानी को कौन रोकेगा
ऊम्र यह सारी कौन सोचेगा
इस कहानी को कौन रोकेगा
ऊम्र यह सारी कौन सोचेगा
ऊ... कौन सोचेगा
साथ काटी है या गुज़ारी है
साथ काटी है या गुज़ारी है
ज़िन्दगी है खेल फिर भी प्यारी है
दिन परेशान है


रंगो से कहुं लकीरों से कहुं
मैली मैली सी तस्वीरों से कहुं
रंगो से कहुं लकीरों से कहुं
मैली मैली सी तस्वीरों से कहुं
तस्वीरों से कहुं
बेकरारी सी, बेकरारी है
बेकरारी सी, बेकरारी है
ज़िन्दगी है खेल फिर भी प्यारी है
दिन परेशान है
रात भारी है
ज़िन्दगी है खेल फिर भी प्यारी है
दिन परेशान है

Edit: Here is the full version too..


I would lose the beats in this version though. They take something away from the beauty of the song, in my opinion.